गणपति आन पधारो | Blog Post by Kavita Agarwal |

गणपति आन पधारो


गणपति आन पधारो , मेरे तन मन धन में ।
हृदय को जान सिंहासन, विराजो मेरे अंतर्मन में।।

अश्रुओं के गंगाजल से, चरण कमल पखारूँ,
मुस्कानों के कुसुमदल से, पवित्र हार चढ़ाऊँ,
भर देना आशा की जोत, मेरे मन-उपवन  में। 
गणपति आन  पधारो,  मेरे तन मन धन में।।

हृदय- रक्त से तिलक लगाऊँ,
श्वासों से अपने चँवर डुलाऊँ, 
धड़कन से गीत सुनाऊँ, मैं अपनेपन में।
गणपति आन पधारो, मेरे तन मन धन में।।

आकर ना जाना कभी,मेरे जीवन में,
हर क्षण देना साथ,मेरे करुण-क्रंदन में,
रखना शीश पे हाथ, संकट के छन में।
गणपति आन पधारो, मेरे तन मन धन में।।
हृदय को जान सिंहासन,विराजो मेरे अंतर्मन में।।
- Kavita Agarwal 
                            🙏🙏

Comments

Popular posts from this blog

एक सुहागन की ओर से माता रानी का बहुत सुंदर भजन | Blog post by Kavita Agarwal |